कुर्सी के लिए दुनिया के आराध्य भगवान राम के अस्तित्व में बदलाव की नाकाम कोशिश करने वाले नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के रुख को अयोध्या से ही कड़ा जवाब मिला है। उन तमाम असंख्य पौराणिक  और आधुनिक जमाने में दुनिया के सबसे बड़ी लोकतंत्र की सर्वोच्च अदालत के उदाहरण गिनाकर। यह बताकर कि निश्चित रूप से भगवान राम हमारे क्षितिज के सर्वाधिक चमकदार सितारे हैं, पर  बहस बेमानीः इतिहासकार

रामनगरी के पुरातात्विक उत्खनन में शामिल रहे अयोध्या के प्रतिनिधि इतिहासकार डाॅ. हरिप्रसाद दुबे के अनुसार अयोध्या की प्रामाणिकता को लेकर छेड़ी जानी वाली बहस ही बेमानी है और इसके पीछे बेवजह का विवाद पैदा करना है। अयोध्या की प्रामाणिकता स्वयंसिद्ध है और यह सच्चाई पुरातत्व, पुराण, महाकाव्य, ऐतिहासिक विवरण, विदेशी यात्रियों के वृत्तांत आदि इतिहास की अनेकानेक कसौटियों से परिभाषित है।

नेपाली साध्वी बोलीं-ओली का बयान मूर्खतापूर्ण

साध्वी चारुशिला रामनगरी में गोलाघाट मुहल्ला स्थित नेपाली मंदिर की प्रमुख हैं। मूलत: नेपाल के ओखुलढूंगा जिला निवासी चारुशिला नेपाली मूल की ही साध्वी जानकी सहचरी के संपर्क में आकर करीब चार दशक पूर्व अयोध्या आ बसीं। यहीं के जानकीशरण मधुकरिया नाम के यशस्वी गुरु की प्रेरणा में रहीं। ओली के बयान से हतप्रभ चारुशिला कहती हैं, बीरपुर किस शास्त्र में लिखा है। वे ओली के बयान को मूर्खतापूर्ण करार देती हैं। नेपाली मूल के ही संत बालकृष्णाचार्य कहते हैं कि अयोध्या की प्रामाणिकता को लेकर संदेह राजनीति और कूटनीति का क्रूर खेल है।

पहले बस चलाई, अब कह रहे इतनी दूर कैसे आए राम

ओली के बयान को हास्यास्पद इसलिए भी बताया जा रहा है कि दो साल पहले खुद उन्होंने भारत और नेपाल के बीच जनकपुर तक चलने वाली बस की अगवानी की थी। पीएम नरेद्र मोदी ने इसे हरी झंडी दिखाई थी। तब ओली ने कहा था कि प्रभु राम की ससुराल से श्रद्धालुओं का नाता मजबूत होगा। इतना ही नहीं, सदियों से जनकपुर के लिए हर साल रामबरात भी निकलती है। नेपाल के लोग भव्य स्वागत करते हैं उसका है।

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