लखनऊ। नेपाली प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के विवादित बयान की कड़ी और कठोर शब्दों में निंदा करते हुए राजनीतिक विश्लेषक अभिषेक सिंह ने कहा कि जिस प्रकार नेपाली प्रधानमंत्री ने प्रभु श्री राम और अयोध्या को लेकर अपना विवादित बयान दिया है, यह उनकी तुच्छ और अवसाद ग्रस्त मानसिकता को दर्शाता है।
अभिषेक सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ओली के इस प्रकार के बयान से भारत के सांस्कृतिक एवं धार्मिक तथ्यों तथा जन भावनाओं को ठेस पहुंची है।ओली का दावा है कि भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या भारत के उत्तर प्रदेश में नहीं है, बल्कि नेपाल के बाल्मिकी आश्रम के पास है। राजनीतिक विश्लेषक अभिषेक सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल खड़े करने वाले नेपाली प्रधानमंत्री ओली का अस्तित्व और भविष्य आज खुद संकट में है! इस तरह के बेबुनियाद और निराधार बयानों से उनको ही नुकसान हो रहा है, और ऐसे गैर जिम्मेदाराना बयान के लिए उनको सार्वजनिक स्तर पर भारत से माफी मांगनी चाहिए। गौरतलब है कि विगत दिनों नेपाली प्रधानमंत्री ओली ने नेपाली संसद में एक राजनीतिक नक्शा पास किया था, जिसमें भारतीय भूभाग के तीन स्थान लिपुलेख,कालापानी तथा लिंपियाधुरा को अपना बताया था। प्रधानमंत्री ओली नेपाल में नागरिकता संशोधन कानून ला रहे हैं ,जो प्रत्यक्ष/परोक्ष रूप से विदेशी नागरिकों अर्थात भारत के लिए अहितकारी है।
अभिषेक सिंह ने कहा कि नेपाली प्रधानमंत्री का भारत विरोधी रुख सीधे तौर पर कहें तो चीन के इशारों पर हो रहा है, कर्ज और निवेश के आधार पर चीन नेपाल में अपना प्रभुत्व स्थापित करता जा रहा है,
जो कि नेपाल और नेपाली नागरिकों के लिए शुभ संकेत नहीं है।
अभिषेक सिंह ने कहा कि नेपाल को वक्त रहते ही चीन की विस्तारवादी नीतियों पर अंकुश लगाना होगा नहीं तो नेपाल का भी वही हश्र होगा जो कि अन्‍य देशों का हुआ था।