कानपुर संवाददाता [शोभित पाण्डेय]।

  • करती है सब कुछ वो न्योछावर,
  • परिवार की खुशियाँ पाने को

    त्यागती है जो अपने मायके को,

    ससुराल को सम्मान दिलाने को!!

  • कभी जो राहो से भटके हम,
  • वही सही राह दिखलाती है,

    उसी देवी के हांथो की ऊँगली,

  • चलना हमें सिखाती है, !!
  • करें जो हम कोई तो,
    खूब पिटाई होती है, !
  • सुलाकर हमको गोद मे अपनी,

    वो माँ खुद नही सोती है, !!

    है उसकी परिभाषा ही अलग,

  • और अलग ही उसका विधान है,
  • त्याग की देवी कहे दुनिया जिसे,

    हर दिल मे उसके लिए सम्मान है, !!

शुभम की कलम से ✍️