सैम्बो फेडरेशन ने किया खिलाड़ियों के साथ अन्याय।

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सुनील चतुर्वेदी।

बिना पूर्व सूचना के तैयार की पहले से निर्धारित अपने लोगो की सूची

ओलंपिक संघ के ट्रायल निर्देशों के अतिरिक्त, खिलाड़ियों को बताए खुद के नियम

अनियमितता को देखते हुए ओलंपिक संघ ने रद्द की सभी सैम्बो खिलाड़ियों की सूची

सैम्बो फेडरेशन पर हो सकती है कड़ी कार्यवाही

दिल्ली/ हरियाणा/ उत्तर प्रदेश/ राजस्थान / कानपुर
परिवारवाद का विवाद केवल भारतीय राजनीति में ही नहीं है, लगभग सारे खेल संघों में है। इसको लेकर आए दिन विवाद सामने आते रहते हैं। ताजा विवाद सामने आया है। सैम्बो फेडरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से जकार्ता भेजी जा रही टीम को लेकर। अगले महीने की 18 तारीख से जकार्ता में होने वाली एशियन गेम्स से पहले वहां भेजे जाने वाले दल में सैम्बो फेडरेशन के सेक्रेटरी डिप्टीराम शर्मा ने अपने बेटे ललित शर्मा और पुत्रवधू रिषाल शर्मा के साथ ही रिषाल शर्मा के पति श्रीकांत शर्मा को टीम में स्थान दे दिया था और अन्य मानकों को पूरा करने वाले खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता बिना सूचना के दिखा दिया।

एशियन सैम्बो खेल में प्रतिभाग करने के लिए जाने भारतीय ओलंपिक संघ कें निर्देश

1- एथलीट को 2014 से 2017 में नेशनल सैम्बो में सिल्वर, गोल्ड या ब्रोन्ज मेडल होना जरूरी।

2- जिन्होंने अपने देश के लिए इंटरनेशनल चैंपियनशिप में संतोषजनक प्रदर्शन किया हो।

3- एथलीट ने 2016 में वियतनाम में बीच एशियन गेम में प्रतिभाग किया हो।

4- वह प्रतिभागी जिन्होंने आखिरी 5 वर्ष में एशियन डोर गेम्स में 2017 तुर्कमेनिस्तान में 5 वीं रैंक हासिल की हो।

पिछले 3, 4 वर्षों में यदि खिलाड़ी भारतीय ओलंपिक संघ के उपर्युक्त में से किसी एक या दो को पूरा करते हैं तो वह एशियन गेमों में प्रतिभाग करने के ट्रायल के लिए पात्र हैं।

देवास में होने वाले सैम्बो ट्रायल में किसी भी खिलाड़ी को नहीं दी गई सूचना

पहले से तय कर ली थी खिलाड़ियों की सूची ट्रायल सिर्फ खानापूरी

वहीं फेडरेशन की ओर के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से जानकारी मिलने पर ट्रायल में दूसरे नंबर पर आने वाली मीनू कुमारी को बेवजह बाहर बैठा दिया गया।
वहीं दूसरी ओर हरियाणा के सुरेंद्र सिंह व उत्तर प्रदेश कानपुर की राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता मधु शर्मा सहित कई खिलाड़ियों को ट्रायल की सूचना भी नहीं दी गई। वही उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी मधु शर्मा के अनुसार कई बार उत्तर प्रदेश सैम्बो एसोसिएशन के महासचिव अनिमेष सक्सेना से इस बाबत बात की गई तो उन्होंने भारतीय ओलंपिक संघ के निर्देश के विपरीत जवाब देते हुए यह कह कर टाल दिया कि कम से कम 3 नेशनल खेलना अनिवार्य हैं। जबकि गया में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में सभी विजेताओं खिलाड़ियों को यह बताया गया था कि खिलाड़ियों को एशियन ट्रायल कैंप के लिए सूचना दी जाएगी। गौरतलब हो कि पिछले दिनों सैम्बो का ट्रायल देवास में आयोजित किया गया था। जिसमें सैम्बो फेडरेशन के ही लोगों द्वारा पहले से ही तय खिलाड़ियों की सूची तैयार कर ली गई थी। जो कि उनके खुद के ही परिवार से संबंध रखते हैं।

खिलाडियों की शिकायत पर लिया गया बड़ा फैसला

मीनू कुमारी, सुरेंद्र सिंह ने इंडियन ओलंम्पिक एसोसिएशन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ सहित तमाम जगह शिकायत भेजी है। शिकायतों को संज्ञान लेते हुए ओलंपिक संघ ने सैम्बो फेडरेशन की ओर से भेजी गई खिलाड़ियों की सूची को प्रमाण पत्र जांचोपरांत रद्द कर दी। जानकारी के अनुसार कोई भी खिलाड़ी सैम्बो खेल में प्रतिभाग नहीं कर रहा है।

सैम्बो फेडरेशन ने शिकायत को लेकर जाहिर की नाराजगी बिना लिखित पत्र के बैन किया खिलाड़ियों को

वही सैम्बो फेडरेशन के अधिकारियों को खिलाड़ियों के हक की लड़ाई इतनी नागवार गुजरी कि इन लोगों ने खिलाड़ियों को बैन करने का फरमान सुना दिया। वह भी बिना किसी लिखित पत्र के खिलाड़ियों के अनुसार सैम्बो के अधिकारियों ने किसी को व्यक्तिगत बैठक कर या जिलास्तरीय एसोसिएशन के माध्यम से खिलाड़ियों को मौखिक सूचना बैन की दे दी गई।

खेल मंत्री व ओलंपिक संघ के बड़े फैसले का इंतज़ार है खिलाड़ियों को

वहीं दूसरी ओर खिलाड़ियों को भारतीय खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर और ओलंपिक संघ के अधिकारियों से उम्मीद की आस अभी भी बंधी हुई है। खिलाड़ियों के अनुसार उन्होंने कड़ी मेहनत करके इस मुकाम तक अपनी पहचान बनाने में सफलता पाई है। फेडरेशन की बड़ी गलती से वह अपने सपने को पूरा करने से चूक रहे हैं। वही इन खिलाड़ियों में मीनू कुमारी जो कि 2 बच्चों की मां भी हैं। जिनके अनुसार फेडरेशन के बैन करने से उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि जब उनका सपना ही टूट जाएगा तो खेलने से क्या फायदा।
जबकि सुरेंद्र बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं उनके माता पिता का देहांत हो चुका है।

अगले अंक में पढ़िए कैसे होता है खेल में खेल, कैसे फेडरेशन में बने रहते हैं कुंडली मारकर और कैसे करते हैं खिलाड़ियों के भविष्य से खिलवाड़

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