कानपुर के नजारे;”अगर आप भी कर रहे है ट्रैन में सफर तो आपको जानना है बहुत जरूरी,ये खबर है सिर्फ आपके लिए,कानपुर सेंट्रल में अवैध वेंडरों की लगातार धमाचौकड़ी जारी】

share on:

कानपुर ब्यूरो【शोभित पाण्डेय】

👉【प्लेटफार्म से लेकर ट्रेनों व शिव नारायन टंडन पुरी शान्ति नगर 12 न0 आउटर पुल के नीचे तथा झकरकटी पुल के नीचे से लेकर तेजाब मील तक व चंदारी,मरी कंपनी पुल के नीचे क्रासिंग व इलाहाबाद तक आने जाने वाली गाड़ियों पर भी अवैध वेंडरों की धमाचौकड़ी, जिम्मेदारों की अनदेखी】

रेलवे स्टेशन में इन दिनों अवैध वेंडरों की भरमार है। वे खुलेआम प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में तथा शिव नारायन पुरी 12 न0 आउटर पुल के नीचे अमानक व दूषित खाद्य सामग्री की बखौफ सप्लाई कर रहे हैं।

👉【कानपुर रेलवे स्टेशन】
में इन दिनों अवैध वेंडरों की भरमार है। वे खुलेआम प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में अमानक व दूषित खाद्य सामग्री की बखौफ सप्लाई कर रहे हैं। आरपीएफ द्वारा दावा किया जाता है कि कार्रवाई में हर माह 60 से 70 अवैध वेंडर पकड़े जाते हैं। उन्हें रेल न्यायालय में पेश किया जाता है। बल्कि हकीकत यह है। कि जब टारगेट को पूरा करना होता है। तब अवैध वेल्डरो को पकड़ा जाता है। अन्यथा रेलवे की साठ – गाठ से अवैध वेल्डरों रोजी – रोटी चलती रहती है। तथा अब जब
★【पत्रकार गौरव शुक्ला, व ग्रामांचल न्यूज के ब्यूरो चीफ शोभित पांडेय】
ने शिव नारायन टंडन पुरी शान्ति नगर 12 न0 आउटर पुल के नीचे खाने की सामग्री बेच रहे । वेंडरों से पूछा आप सब खाने पीने कि सामग्री कैसे बेच रहे हो तो पानी ,अमरूद बेच रहे
【अजय बिहारी ,लड़का आलम बिहारी,व नवल,सुनीता,】 ने बताया जो लोग पुल के नीचे माल बेच रहे है। सभी लोग ★★आर पी एफ के कारखास ब्रजेश त्रिपाठी, संदीप शुक्ला व सी बी आई कारखास अब्बास ,,हसन तिवारी को रोज का 1500 रु0 देते है।* वो भी एक लड़के का सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आप सभी को बताते चले अवैध वेंडरों में अजय बिहारी RPF को कैंटीन की दारू भी देता है। वही दूसरी तरफ सुनीता का पति सीओडी में सरकारी नौकरी करता है। जो कि 11 बजे जाकर हाजरी लगा शिव नारायन टंडन पुरी शान्ति नगर 12 न0 आउटर पुल के नीचे अमरूद, पानी गुटखा बेचने का कार्य करता है। जिसका सारा दारोमदार आर पी एफ के कारखास त्रिपाठी जी व संदीप शुक्ला, व सी बी आई कारखास अब्बास,हसन तिवारी, को जाता है।जिससे काम कर रहे अवैध वेल्डरो के हौसले बुलंद है। व ऊपर से नीचे तक सबकी जेब रोजाना भर रही है।

👉【खरी – खरी मगर सच्ची बात】

शिव नारायन टंडन पुरी शान्ति नगर 12 न0 आउटर पुल के नीचे जब ★【पत्रकार गौरव शुक्ला , शोभित पांडेय】
पूरा नजारा गुप्त कैमरे में कैद कर रहे थे । तभी काम कर रहे अवैध वेंडरों मे नवल नाम के यूवक ने अपने भाई अकाश, छुन्नू,सूरज अंकित,नवल,बाबू, व आसपास में साथ रह रह रहे नव यूवको के साथ घेर लिया व कैमरा, मोबाइल छीना विडिओ डिलीट करने लगे विडिओ डिलीट न होने पर हाथापाई करने लगे तभी , वहाँ पर पत्रकार गौरव शुक्ला को जानने वाले एक यूवक ने आकर मामले को लेदेकर शांत करने की बात कही मगर पत्रकार साहब ने ऐसा न करके मामले को उजागर कर आपसब के सामने लाने के लिए काफी मसक्क्त करी।।

एक तरफ सूबे सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी पत्रकारो की सुरक्षा करने की बात करते है। और यहाँ अधिकारी है। कि आदेशो की धज्जियां उड़ाए हुवे है। फिर वो चाहे यू0पी0 पुलिस हो या जीआरपी ससीबीआई के जवान खैर ये लोग तो इससे भी बड़े कारनामे करते रहते है। जो हम सभी लोग जानते है। तो यह कौन सी बड़ी बात है।।


इन दावों के बावजूद कानपुर स्टेशन में अवैध वेंडरों की धमाचौकड़ी कम होने का नाम ही नही ले रही है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म व ट्रेनों में अवैध वेंडर दूषित समोसा, चाय व अन्य खाद्य सामग्री बेचकर हर रोज हजारों रुपए की कमाई कर रेलवे की राजस्व को हानि पहुंचा रहे हैं। ये लोग अधिकारियों की मौन स्वीकृति का फायदा उठाकर अपना धंधा बेखौफ करते हैं।

👉【चोरियों में भी कई बार वेंडरों का नाम】

सूत्रों के अनुसार, ट्रेनों में होने वाली चोरियों में भी कई बार वेंडरों का नाम आया है। इससे पहले भी रेल पुलिस यात्रियों का सामान चुराने के मामले में कई वेंडरों पर कार्रवाई भी कर चुकी है। खासकर स्लीपर और एसी कोच में होने वाली वारदातों को अंजाम देने में इन अवैध वेंडरों की अहम भूमिका होती है।

👉【महज डेढ़ दर्जन ही वैध】
रेलवे स्टेशन में यात्रियों को खान-पान सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रेलवे द्वारा दो ठेकेदारों को खान-पान स्टॉलों का ठेका दिया गया है। उसमें करीब डेढ़ दर्जन वेंडरों को खाद्य सामग्री बेचने के लिए वैध किया गया है। इसके अलावा जो भी वेंडर वहां पर खाद्य सामग्री बेचता है वह अवैध रूप से खाद्य सामग्री बेच रहा है। ट्रेन के आने पर अवैध वेंडर स्टेशन में आ जाते हैं। इनकी संख्या करीब दो दर्जन है। कई बार वैध और अवैध वेंडरों के बीच मारपीट भी हो चुकी है।

👉【कौन वैध, कौन अवैध】
रेलवे स्टेशन में अधिकारियों की शह पर जहां अवैध वेंडर मनमानी कर समोसा, चाय-पानी आदि खाद्य सामग्री बेच रहे हैं, वहीं वैध वेंडर कई बार यूनीफॉर्म तक नहीं पहनते। बताया जाता है कि बाहर की टीम व डीआरएम-एडीआरएम के निरीक्षण के दौरान ही वेंडर लकदक यूनीफॉर्म, कैप व ग्लब्ज में नजर आते हैं। रेलवे स्टेशन में खाद्य सामग्री बेचे जाने के लिए वेंडर का मेडिकल कार्ड व पहचान पत्र कार्ड भी बनाया जाता है। जीआरपी द्वारा पुलिस वेरीफिकेशन भी वेंडरों का किया जाता है।

👉【ट्रेन के आते ही लगता है मजमा】
कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन उत्तर मध्य रेलवे के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक है. यहाँ से प्रतिदिन 280 से अधिक ट्रेनें गुजरतीं हैं. यह दिल्ली स्टेशन के साथ दुनिया में सबसे बड़ा इंटरलॉकिंग मार्ग सिस्टम का रिकॉर्ड भी रखता है. इस स्टेशन से प्रतिदिन 3 लाख यात्री आते जाते हैं. कानपुर सेंट्रल के 10 प्लेटफोर्म हैं. लोगों के लिए इसे 1930 में खोला गया था.
इसके चलते गाडि़यों से लेकर सभी प्लेटफॉर्मों में हर वक्त हजारों की संख्या में यात्री मौजूद होते हैं। अवैध वेंडर यात्रियों को मनमाने दाम पर सामान बेचकर रोजाना हजारों की कमाई करते हैं। 5 की चाय 10 में व 15 का पानी 25 में लेना यात्रियों की मजबूरी होती है। आमतौर पर जब आउटर में ट्रेन नहीं रहती है तो उस समय अवैध वेंडर कम ही दिखाई देते हैं। लेकिन जैसे ही ट्रेन आकर खड़ी होती है दो दर्जन से अधिक अवैध वेंडर आउटर पर पहुंच जाते हैं।

ट्रेन व प्लेटफॉर्म में लगातार चेकिंग कर अवैध वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। हर माह 60 से 70 वेंडरों को पकड़ रेलवे न्यायालय में पेश किया जाता है।

👉【झकरकटी पुल के नीचे से लेकर तेजाब मील तक की पटरियों पर खाना पान सामग्री लेना मतलब बीमारी को बुलाना】

झकरकटी पुल के नीचे से लेकर तेजाब मील तक की पटरियों पर बिकने वाले खाने की क्वालिटी पर सवाल, नट बस्ती में खाना बना कर झकरकटी पुल के नीचे से लेकर तेजाब मील तक की पटरियों पर बेच रहे है। वही काम कर रहे वेंडरो में कंगारू,मगरू,झिल्ली,बलि, ने बताया यहाँ का हर एक काम करने वाला वेंडर जीआरपी ,व आरपीएफ तथा सीबीआई को रोज का एक हजार रु0 देता है। और उन्हें पैसे देने के बाद कोई नही पकड़ सकता। वही टोटल 48 वेंडरों से ज्यादा लोग काम करते है। अब आप लोग अंदाजा लगा सकते है। जीआरपी,आरपीएफ,व सीबीआई की एक दिन की कमाई कितनी होगी।।

👉【पैसेंजर्स की सेहत से खिलवाड़ कर वेंडर कर रहे कमाई,】
अधिकारियों की आंखें बंद औऱ तो और जीआरपी,व आरपीएफ कारखास,सीबीआई कारखास, कहते है। मै किसी पत्रकार से नही डरता जिसको जो उखाड़ना है। उखाड़ ले जिस दिन पता चला मेरे खिलाफ किसी पत्रकार ने कुच्छ छापा है। उसी दिन उस पत्रकार को बंद कर दूँगा।। ये जुबानी है। खुद त्रिपाठी व सीबीआई कारखास अब्बास की यह खबर प्रकाशित होने के बाद भी हो सकता है। उस पत्रकार के साथ भी यह ऐसा ही करे एक तरफ सूबे सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी पत्रकारो की सुरक्षा करने की बात करते है। और यहाँ अधिकारी है। कि आदेशो की धज्जियां उड़ाए हुवे है। फिर वो चाहे यू0पी0 पुलिस हो या जीआरपी ससीबीआई के जवान खैर ये लोग तो इससे भी बड़े कारनामे करते रहते है। जो हम सभी लोग जानते है। तो यह कौन सी बड़ी बात है।।

👉【सिग्नल ना मिलने की वजह से】
झकरकटी पुल के नीचे से लेकर तेजाब मील तक की पटरियों पर रुकने वाली ट्रेनें में अगर आपको भूख लगती है तो वहाँ पर मिलने वाली खान – पान की सामग्री के भरोसे न रहे, क्योंकि यहां पर वेंडर जो आपको खाना परोस रहा है। वह आपकी सेहत भी खराब कर सकता है। यह खाना नाली किनारे बेहद गंदगी के बीच बनाया जा रहा है और इसे बनाने के लिए जिस सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है वह भी बेहद घटिया है। खेल यहीं तक सीमित नहीं है वेंडर तो कई ट्रेनों में जीआरपी व सीबीआई कारखास से सांठगांठ कर थर्ड क्लॉस क्वालिटी का खाना बेच रहे हैं। अब रेलवे अधिकारी इस गोरखधंधे पर बेपरवाह है या जानबूझ कर नजर फेरे हैं इस पर भी सवाल उठता है।

👉【ये खाना बीमार बना देगा】

झकरकटी पुल के नीचे से लेकर तेजाब मील तक की पटरियो पर व शांति नगर क्रासिंग पर जो खाना बिक रहा है। उसमें से कई वेंडर रोड के किनारे फुटफाथ पर अपनी जगह से पूड़ी सब्जी बना कर लाते हैं। उसी में से एक वेंडर ने अपना किचन पटरी के ठीक सामने की तरफ नट बस्ती में नाली किनारे बना रखा है यहां पर खाना जिस गंदगी में बनाया जाता है। वह आपको बीमार करने के लिए काफी है। जिन स्थितियों में यह खाना बनाया जा रहा है उसे देखने के बाद आप झकरकटी पुल के नीचे से लेकर तेजाब मील तक की पटरियों पर व शांति नगर क्रासिंग पर सिग्नल ना मिलने के कारण रुकने वाली ट्रेनों में अवैध वेंडर्स से खाना खरीदने की हिम्मत भी नहीं करेंगे।

👉【वेंडर नहीं नोट छापने की मशीन कहिए】

झकरकटी पुल के नीचे से लेकर तेजाब मील तक व शांति नगर क्रासिंग की पटरियों पर हर घंटे में यहां से गुजरने वाली दर्जनों ट्रेनों की वजह से यहां कभी पैसेंजर्स की कमी नहीं होती। एक वेंडर के बिकने वाले खाने से एक दिन की कमाई 20,000 से 25,000 हजार से ज्यादा होती है। इसी कमाई के चक्कर में आरपीएफ व सीबीआई कारखास द्वारा वेंडर के लिए शर्ते लगाई जाती हैं। क्या खाना बेचना है उसके क्या रेट और क्वांटिटी होगी यह सब सीबीआई कारखास व आरपीएफ कारखास द्वारा निर्धारित रहता है। एक उदाहरण से इसको समझे तो इन वेंडर्स को राजमा की सब्जी व चावल का लाइसेंस ही नही होता है लेकिन वह आलू की सब्जी और पूरी ,गुटखा , पानी, चाय ,मोमफली, अमरूद, और इस टाइम पानी तक बेच देते हैं।

👉【घटिया खाद्य सामग्री का यूज】

झकरकटी पुल के नीचे से लेकर तेजाब मील तक की पटरियों व शांति नगर क्रासिंग पर रुकने वाली ट्रेनों में जो खाना यह वेंडर बेचते हैं। उसकी क्वालिटी तो बेहद घटिया होती है क्योंकि इसे बनाने में यूज किए जाने वाले चावल, मसाले और सब्जियां सभी घटिया क्वालिटी की होती हैं। ख्0 रुपए के चावल सब्जी और रोटी की क्वालिटी चेक करने के लिए लाइसेंस ना होने के बाद अभी तक सैंपल नहीं लिए गए हैं।

👉【कई ट्रेनों में बिक रहा यही खाना】

★●नाली किनारे बना यह खाना सिर्फ यात्रियों की तबियत खराब कर रहा है। वेंडर इसे ट्रेनों में अवाज लगा कर भी बेचते हैं.कानपुर से चलने वाली कई ट्रेनों जिसमें पैंट्रीकार नहीं होती। उसमें यही खाना र्डिब्बा बंद कर दाम बढ़ा कर बेचा जाता है। बाबा बर्फानी एक्सप्रेस से लेकर अमृतसर, संगम, गोमती एक्सप्रेस जैसी कई ट्रेनों में यह खाना बिना किसी की परमीशन के सिर्फ सीबीआई कारखास , आरपीएफ कारखास की सांठगांठ के बूते बेचा जाता है।

★स्टेशनों और ट्रेनों में मिलने वाले खाने की बेहतर क्वालिटी के लिए खासतौर से जोर दिया जाता है। वेंडर्स को भी लाइसेंस इश्यू करते समय यह सारी शर्तो को पूरा करना होता है। अगर नाली किनारे खाना बना कर
झकरकटी पुल के नीचे से लेकर तेजाब मील तक की पटरियों पर व शांति नगर , या चंदारी क्रासिंग पर बेचने की बात है ये गंभीर मामला है। खाने की क्वालिटी की जांच कराई जाए अगर गड़बड़ी मिलती है। तो कार्रवाई तय होनी चाहिए।।

★ साथ ही सभी वेंडरों के हौसले बुलंद है। और आरपीएफ कारखास ,,,, सीबीआई कारखास ,,,,,की जेब भर रहे है।

share on: