साहित्य

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मजहबी इंसान।

----------- हर मजहबी अकराम अब छपते अखबारों में, सियासत शामिल होता है , अबके त्योहारों मे, खुशगर्दी किसको...

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अधिक शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। नशा

क्यों ना मैं मयखाने जाऊं क्यों ना मैं बोतल पाऊं हर बूंद में स्फूर्ति है जिसके क्यों ना...

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पहली बारिश।

आज पहली बारिश से लगता है कुछ ऐसे प्रभु ने आज फिर से पुनर्जन्म किया हो जैसे ।...

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बादल।

नई सदी का नया सूरज बिखेर रहा छरहरी छटा, प्रतिपल यामिनी चमक-दमक दिखा रही है खेल नया। काले...

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नटखट बचपन।

चिलचिलाती हुई धूप में नंगे पाँव दौड़ जाना, याद आता है वो बचपन याद आता है बीता जमाना।...

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असफलता के आगे जीत है।

------------दोस्तों, युवा वर्ग में आजकल जो प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही वो है रातो रात सफल हो जाने...

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प्रकृति देवी।

यूं ना अश्रु बहाओ मन में तुम धीर धरो, जा रहा हूं हे प्रकृति देवी हंसकर मुझे तुम...

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अपनापन —

विस्मृत हो चला नितान्त तु खोज हृदय एकान्त ! किंकर्त्वयमूढ़ बन कर मन को होने दे अशान्त !...

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यादों की पुरवाई —

यादों की चली है ऐसी पुरवाई । पुरानी चोट कोई फिर उभर आई ।। कभी तो लोग कहते...

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परिचय।

बनना तो गुमशुदा बनना ,। कभी ना किसी का खुदा बनना ।। लोग आते है उलझनो मे रहने...